Saturday, 10 August 2024

Suraj ki Muh Dikhayi

कई दिनों बाद आज देखो,

सूरज ने अपनी रजाई हटाई,

मलकर अपनी ऑखों को,

आज थोड़ी धूप बरसायी।


सूरज की किरणों को देख,

फूल पत्तियों ने आंहें भरी,

बनती इमारतों की तरफ,

धूल भी चुन्नी लहराए खूब उड़ी।


धुले हुए कपड़े आज झूम उठे,

सूरज की जो हुई मुंह दिखाई,

बादल ने काले चश्मे पहने,

फिर अपनी बांहें फैलाई।