Wednesday, 4 January 2023

My Periwinkle

With her sparkling eyes she asks,

Will you be looking out for me when I fly?

Will you be catching me when I fall from the sky?

Dear Daddy, will you be here for me forever and ever?

 

“Dear daughter, close your eyes and remember,

Yes, you will find me near you forever and ever,

On a dark night when you find a ray of hope,

With every hurdle you jump, and you cope,

After every fall you rise and try harder,

You smile through your tears with a fervour,

You see the sun smiling through the foggy cloud,

You can hear the wind chime amongst the crowd,

You get soaked with a light sprinkle,

And, you find me growing in a pot as your periwinkle.”

ग़ज़ल पूरी कैसे करूं....

 गिला ये मुझसे करते हैं कि उड़ती नहीं मैं,

पर जो कभी करूं जिद्दो जहद छूने कोई ऊंचाई,
कहते हैं के न फैलाऊं पर अपने मैं,
चाहत उनकी के मैं बनी ही रहूं एक परछाई।

सिकुड़ते सिकुड़ते जब दिल मैला सा लगे,
गुनगुना लेती हूं कोई तराना मैं,
और कभी बेरंगी सी लगे मंजर तो,
रंग बिखेर देती हूं किसी कोरे कागज पे।

कभी तो किसी ने पूछ ही लिया मुझसे,
क्या कुछ घंटों का इज़ाफा हो गया है मुझे?
अब कैसे बताऊं उनको आपबीती अपनी,
के सूई में धागा पीरोने को भी तरसू मैं।

कश्मकश एसी है मेरी क्या सुनाऊं,
अल्फाज़ भी पूरे नहीं पड़ रहें,
और तुकबंदी भी नहीं मिल रही,
फिर ग़ज़ल पूरी करूं तो करूं कैसे।

शीशे की बोतल में रखा ख्वाब है मेरा,
शाम ढलने से पहले तेरा दीदार कर आऊं,
तकदीर को एक नया नाम देना है मुझे,
बस किसी दिन उस नाम को जी पाऊं।

एक आगाज़ नयी उड़ान के लि ए

  घड़ी की जैसे एक सूई बन गई हूं,
  मानो बस रफ्तार से चलती जा रही हूं,
  सुध नही है किसी पल की,
  जी जान से मगर उलझती जा रही हूं।

  शाम सवेर की भागम-भागी में,
  मेरा सपना अधूरा ही पाऊं मैं,
  कभी जो मिले फुर्सत भी,
  तो तिनके तिनके ही जुटाऊं मैं।

  चुभन होती है कई तीरों की,
  जब भी खुला नीला आसमान देखूं,
  कोसूं के घने बादल छा जायें तुझपर,
  फिर तेरी मैं भी ये मुस्कान देखूं।

  कई सालों से एक आस लिए,
  खड़ी हूं दरवाजे की चौखट पे,
  बस थोड़ी ही दूर भरी महफिल से,
  एक आगाज़ हो नयी उड़ान के लिए।