सुकून के पल कहाँ मिलते हैं,
काश कोई बता देता,
किस गली, दुकान में बिकता हो,
पता भी कोई बता जाता।
ऐसा नहीं कि हमने खोजा नहीं,
जब से खोई है मिलती नहीं,
दूरबीन से भी झांका कभी,
पर कमबख्त दिखती ही नहीं।
आसपास ही घूमती रहती थी,
और तब हमने पूछा नहीं,
अब इस तरह रूठ गई,
कि चाहने से भी आती नहीं।
सब कहते हैं पास ही रखा करो,
साथ ही लेके घूमो फिरो,
ये कौन लोग हैं बताए कोई,
जिन्हें ये मिलती है आसानी से।
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