Friday, 22 November 2024

शम्मा जो तुम्हारे अंदर है....

 जब घड़ी की सुईयां कम लगे,

और लगे खूब सारे काम हैं पड़े,

तनाव थकन जो साथ लाए,

रातों की भी नींद गवांए।

        मायूसी का कोई अंत न दिखे,

एक लंबी अंधेरी सुरंग सामने हो,

लहर लहर कई तूफान उठे,

थोड़ा रुककर गहरी सांस जरा भर लो।



सुनो जरा चहकती चिड़ियाॅ क्या कहती हैं,

उनके संग गुनगुना लो तुम भी कोई धुन अपनी,

साथ में चाय की चुस्की भी भर लो,

और बुन लो अपनी छोटी दुनिया कहीं।


जो शम्मा तुम्हारे खुद के अंदर है,

वही जला सकती है गहरे अंधेरे को,

चमकने का हुनर तुममें ही है,

हवा का रुख भी तुम ही बदल सकते हो।

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