पुरानी तस्वीरें धुंधली मटमैली,
आज सोचा लिख ही डालूं,
क्या रखूं छुपाए अपनी आपबीती।
कभी चले थे कदम मिलाकर,
कहीं मुड़ गए राहें बदलकर,
कुछ मंज़र साथ रहे कुछ छूट गए,
फिर पता नहीं जहन से कब उतर लिए।
ऐसे तो कई आए साथ निभाने,
तूफ़ान के डर से ही भाग लिए,
कभी तो गहरी चोट लगी,
तो कभी ठोकर खा संभल गए।
अब क्या ही करूं गिला उनसे,
जो हाथ मिलाकर मुकर चले,
शुक्रगुज़ार हूँ मैं उनकी तहेदिल से,
जो परछाइयां आज भी मेरे साथ चलें।
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