दोनों हाथों को जोड़े खड़े हैं,
मन्नत तो पूरी हो जाए अब,
कब से अपने दिल को थामें हैं।
एक आस जो टूटी कई बार,
और सपना भी टूटा हर बार,
फिर भी कदम उठाया हमने,
दिल को किसी तरह मनाया हमने।
ले झोली फैलाई है फिर से,
चाॅदनी जरा सी हमें भी दे दे,
सिर झुकाए फिर चलें आए हैं,
इस बार सुनले अरज हमारी।
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