Tuesday, 24 February 2026

फूल खिला दो अब हमारी कुटिया में

जो झलक तूने दिखलाई है,
दीदार पूरी करवाना अब,
सावन की बस फुहार नहीं,
बारिश पूरी ले आना अब। 

हरी भरी पत्तियों के बीच,
वो कली जो मुस्काई है, 
धीमे धीमे ही सही पर,
मेरी तो जान में जान आई है।

रोशन कर दो हमारी कुटिया भी,
जैसे अंधेरे में चमकाई चाँदनी है,
बीज को तो पनपा दिया तुमने,
फूल खिला दो अब हमारी बगिया में।



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