Monday, 9 March 2026

आंगन रंग देना

 वीणा पे तो राग रचा दी,

बांसुरी में भी तान सजा दी,

बोल लिखकर दि खाए तुमने,

संगीत को अब पूरी कर देना।


ओस की बूंदें छिड़का दी मुझपे,

पर इनसे क्या प्यास बुझेगी,

भरा पूरा संसार बसा दो,

तब जाके ये बात बनेगी।


भरोसा तुम पर अटूट हमारा,

भरोसे की लाज रख लेना,

एक रंग अब अकेला पड़ा है,

तीन रंगों से आंगन रंग देना।


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